Category Archives: हिन्दी व्याकरण

हिन्दी व्याकरण – शब्द भंडार – अनेक के एक शब्द

इसे इस प्रकार समझा जा सकता है-   1 जहाँ पहुँचा न जा सके   अगम, अगम्य 2 जिसे बहुत कम ज्ञान हो, थोड़ा जानने वाला   अल्पज्ञ 3 मास में एक बार आने वाला   मासिक 4 जिसके कोई संतान न हो   निस्संतान 5 जो कभी न मरे   अमर 6 जिसका आचरण अच्छा… Read More »

हिन्दी व्याकरण – शब्द भंडार – पर्यायवाची शब्द

पर्यायवाची का तात्पर्य क्या है ? पर्याय का मतलब है- समान । यानी समान अर्थ व्यक्त करने वाले शब्दों को पर्यावाची शब्द कहते हैं ।   पर्यायवाची शब्दों से किसी भी भाषा की सबलता की बहुता को दर्शाता है । पर्यायवाची शब्द के कुछ उदाहरण-   शब्द पर्यायवाची   अचानक अकस्मात, अनायास, एकाएक, दैवयोग  … Read More »

हिन्दी व्याकरण – शब्द रचना – उपसर्ग और प्रत्यय

रचना या बनावट के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं-   रूढ   यौगिक और   योगरूढ़     रूढ़ शब्द वह होते हैं जो परंपरा से एक विशेष अर्थ में चले आ रहे हैं और इनका शब्दांश या शब्द खंड निरर्थक होते हैं । जैसे- हवा, बकरी, नीम इत्यादि ।   यौगिक शब्द वह… Read More »

हिन्दी व्याकरण – शब्द रचना – समास

समास की परिभाषा क्या है ? समास का अर्थ है ‘संक्षिप्तीकरण’। दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नये और सार्थक शब्द को समास कहते हैं ।   जैसे- कमल के समान नयन  इसे हम कमलनयन  भी कह सकते हैं। सामासिक शब्द समास के नियमों से बने शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं । इसे समस्तपद भी… Read More »

हिन्दी व्याकरण – शब्द रचना – संधि

संधि किसे कहते हैं ? दो वर्णों या ध्वनियों के विकार से होने वाले विकार को संधि कहते हैं । जैसे- विद्या+आलय= विद्यालय, सु+उक्ति= सूक्ति, गण+ईश= गणेश । संधि के भेद संधि के भेद-संधि तीन प्रकार की होती हैं- 1. स्वर संधि 2. व्यंजन संधि और 3. विसर्ग संधि विस्तार से- 1. स्वर संधि दो स्वरों… Read More »

हिन्दी व्याकरण – वाक्य

वाक्य-विश्लेषण सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वाक्य क्या है । एक विचार को पूर्ण रूप से प्रकट करने वाला शब्द-समूह वाक्य कहलाता है । जैसे- मैं दो दिन से बीमार हूं ।   इसी तरह, किसी वाक्य के विभिन्न घटकों (पदों या पदबंधों) को अलग-अलग करके उनके परस्पर संबंध को बताना वाक्य विश्लेषण कहा जाता है । इस… Read More »

हिन्दी व्याकरण – अव्यय

अव्यय किसे कहते हैं ? अव्यय का शाब्दिक अर्थ है जिस शब्द का कुछ भी व्यय न हो । दूसरे रूप में, अव्यय वे शब्द हैं जिनके रूप में लिंग-वचन-पुरुष-काल इत्यादि व्याकरणिक कोटियों के प्रभाव से कोई परिवर्तन नहीं होता । जैसे-  पर,  लेकिन,  ताकि,  आज,  कल,  तेज,  धीरे,  अरे,  ओह  इत्यादि । अव्यय के… Read More »

हिन्दी व्याकरण – वचन

हिंदी व्याकरण में वचन को किस रूप में परिभाषित किया गया है ? शब्द के जिस रुप से एक या अनेक का बोध होता है उसे वचन कहते हैं । वचन दो होते हैं- एकवचन बहुवचन एकवचन शब्द के जिस रूप से एक ही वस्तु का बोध हो,  उसे एकवचन कहते हैं । जैसे– बच्चा,  कपड़ा,  माता, लड़का,  गाय,  माला,… Read More »

हिन्दी व्याकरण – वाच्य

वाच्य किसे कहते हैं ? वाच्य का शाब्दिक अर्थ है- बोलने का विषय ।   क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किए गए विधान का विषय कर्ता है, कर्म है या भाव है उसे वाच्य कहते है । वाच्य के तीन प्रकार हैं- 1.  कर्तृवाच्य 2.  कर्मवाच्य 3.  भाववाच्य विस्तार… Read More »

हिन्दी व्याकरण – मुहावरे और लोकोक्तियाँ

मुहावरा कोई भी ऐसा वाक्यांश जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करे उसे मुहावरा कहते हैं  । लोकोक्ति लोक-अनुभव से बनने वाली उक्तियां जो किसी समाज ने लंबे अनुभव से सीखा है उसे एक वाक्य में बाँध दिया है । अक्ल-संबंधी मुहावरे मुहावरे उदाहरण अक्ल चकराना– (कुछ समझ में न… Read More »